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«Сады праведных» имама ан-Навави. Хадис № 1603

16 июня 2019



 

1603 – وعن أَبي عليٍّ سويدِ بن مُقَرِّنٍ — رضي الله عنه — قَالَ :

لَقَدْ رَأَيْتُنِي سَابِعَ سَبْعَةٍ مِنْ بَنِي مُقَرِّنٍ مَا لَنَا خَادِمٌ إِلاَّ وَاحِدَةٌ لَطَمَهَا أصْغَرُنَا فَأَمَرَنَا رسولُ الله — صلى الله عليه وسلم — أنْ نُعْتِقَهَا . رواه مسلم .

 

1603 – Сообщается, что Абу ‘Али Сувайд бин Мукаррин, да будет доволен им Аллах, сказал:

«Я являлся одним из семи сыновей Мукаррина, и не было у нас слуг, кроме одной (рабыни), которой младший из нас давал пощёчины, а посланник Аллаха, да благословит его Аллах и приветствует, велел нам отпустить её на волю». Этот хадис передал Муслим (1658).

 

 

 

وفي روايةٍ :

(( سَابعَ إخْوَةٍ لِي )) .

 

В другой версии (этого хадиса, также приводимой Муслимом, сообщается, что Сувайд, да будет доволен им Аллах, сказал):

«У меня было шесть братьев …».

 

 

 

 

شرح الحديث من دليل الفالحـــين

 

 

 

( وعن أبي علي سويد) بضم المهملة وفتح الواو وسكون التحتية بعدها مهملة ( ابن مقرن) بصيغة الفاعل من القرين بالقاف والراء والنون ابن عائذ بن منجا بن هجير بن نضر بن حشية بن كعب بن نور بن هدمة بن الأطم بن عثمان بن عمر بن اد المزني، يقال لولد عثمان بن عمرو وأخيه، أوس مزينة نسبوا إلى أمهم مزينة، بنت كلب بن وبرة يكنى أبا عدي، وقيل أبو عمرو سكن الكوفة.
روى له عن رسول الله — صلى الله عليه وسلم — ثلاثة أحاديث، أخرج عنه مسلم حديثاً واحداً، ولم يذكر ابن الأثير عام وفاته ولا محلها ( رضي الله عنه قال لقد رأيتني) ْبضم التاء، ومن خصائص أفعال القلوب، جواز اتحاد فاعلها ومفعولها، أي: علمتني ( سابع سبعة) ويصح كون رأى: بصرية، وسابع منصوب على أنه حال ( من بني مقرن) وهم سبع إخوة كلهم صحابة مهاجرون، لم يشاركهم أحد في مجموع ذلك، كما قاله ابن عبد البر، وغيره النعمان ومعقل وعقيل وسويد وسنان وعبد الرحمن.
قال ابن الصلاح: وسابع لم يسم لنا، قال الحافظ زين الدين العراقي، في شرح ألفية الحديث: قد سماه ابن فتحون في ذيل الاستيعاب، عبد الله بن مقرن.
وذكر أنه كان على سيرة أبي بكر، في قتال أهل الردة، وأن الطبري ذكر ذلك، وحكى ابن فتحون، أن بني مقرن عشرة فالله أعلم.
وذكر الطبري في الصحابة أيضاً: ضرار بن مقرن، خلف أخاه لما قتل بنهاوند اهـ.
( ما لنا خادم إلا واحدة) جملة في محل المفعول الثاني لرأى، إن كانت علمية.
وسابع حال من المفعول الأول.
وإن كانت بصرية فهي محل الحال من الياء، فتكون مع ما قبلها حالاً مترادفة.
( لطمها أصغرنا) لم يعينه المحدثون فيما رأيته، أي: ضربها ببطن كفه ( فأمرنا رسول الله — صلى الله عليه وسلم — أن نعتقها) ليكون اعتاقها كفارة لضربها؛ ففيه غلظ تعذيب المملوك، والاعتداء عليه ( رواه مسلم.
وفي رواية) له ( سابع إخوة لي) بدل قوله سابع: سبعة.